निसर्ग - एक दृश्य
(हमारी वसुंधरा का अप्रतिम सौन्दर्य)
ये खिलता - सा सूरज ,ये रंगीन दिशाएँ,
ऋतुओं की बाहों में ,गुनगुनी हवाएँ,
कजरारी कोयलिया -सा कुहुक उठा मन
देखो
झुमने लगा है आज अपना चमन
सुनहरी-सी धूप खिली महुआ के गाँव में,
सौंधी-सी खुश्बू उठी बरखा के छाँव में,
खिले मयूर पंख तो महक उठा मन,
देखो झुमने लगा है आज अपना चमन |
हँसी लगे निर्मल-सी नदिया के धार की,
छंद बुने तितली ने भंवरों के पुकार की,
इन्द्रधनुषी रंगों से चहक उठा मन,
देखो झुमने लगा है आज अपना चमन |
द्वारा- ऋता