Sunday, December 19, 2021

निसर्ग - एक दृश्य

(हमारी वसुंधरा का अप्रतिम सौन्दर्य)

ये खिलता - सा सूरज ,ये  रंगीन दिशाएँ,  

ऋतुओं की बाहों में ,गुनगुनी हवाएँ,

कजरारी कोयलिया -सा कुहुक उठा मन 

देखो झुमने लगा है आज अपना चमन 

 

सुनहरी-सी धूप खिली महुआ के गाँव में,

सौंधी-सी खुश्बू उठी बरखा के छाँव में

खिले मयूर पंख तो महक उठा मन,

देखो झुमने लगा है आज अपना चमन |  


हँसी लगे  निर्मल-सी  नदिया के धार की,

छंद बुने तितली ने भंवरों के पुकार की,

इन्द्रधनुषी  रंगों से  चहक उठा मन,

देखो झुमने लगा है आज अपना चमन |

                                     द्वारा- ऋता            

 

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